31 March 2009

कब पिटारी से निकल दिल्ली गये विषधर,ये सियासत की बहस अब है सँपेरों में...

...इस बार की आनेवाली गरमी व्यस्त रखने वाली है इधर हमें...पड़ोस की खलबली...पलायन...माहौल...वादी की हवा-सब इसी की अग्रीम सूचना दे रहे हैं। इस जमी बर्फ से और इसके पिघलने से कुछ दर्दनाक और कई विजयी-उल्लास वाली यादें जुड़ी हुईं हैं...कभी अपनी पुरानी डायरी के ये तमाम वरक पलटूँगा आप सब के समक्ष। तब तक एक गज़ल सुन लीजिये। एकदम ताजा। अभी-अभी गुरू जी के हाथों संवर कर आयी हुई। बहरे रमल पर। पेश है:-


देख पंछी जा रहें अपने बसेरों में
चल, हुई अब शाम, लौटें हम भी डेरों में

सुब्‍ह की इस दौड़ में ये थक के भूले हम
लुत्फ़ क्या होता है अलसाये सबेरों में

अब न चौबारों पे वो गप्पें-ठहाकें हैं
गुम पड़ोसी हो गयें ऊँची मुँडेरों में

बंदिशें हैं अब से बाजों की उड़ानों पर
सल्तनत आकाश ने बाँटी बटेरों में

देख ली तस्वीर जो तेरी यहाँ इक दिन
खलबली-सी मच गयी सारे चितेरों में

जिसको लूटा था उजालों ने यहाँ पर कल
ढ़ूँढ़ता है आज जाने क्या अँधेरों में

कब पिटारी से निकल दिल्ली गये विषधर
ये सियासत की बहस, अब है सँपेरों में

गज़नियों का खौफ़ कोई हो भला क्यूं कर
जब बँटा हो मुल्क ही सारा लुटेरों में

ग़म नहीं, शिकवा नहीं कोई जमाने से
जिंदगी सिमटी है जब से चंद शेरों में

....अगली पेशकश के साथ जल्द लौटता हूँ।

34 comments:

  1. देख पंछी जा रहे है अपने बसेरो में.....
    " इस शेर ने ही बहुत कुछ व्यक्त कर दिया है.......अपने बसेरे में ही जा कर जहां भर के दुखो से आराम मिलता है.....बसेरा शब्द ही जैसे जिन्दगी का एक पडाव है जिसकी सब को तलाश रहती है....शानदार"

    regards

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  2. WAAH GAUTAM JI WAAH...
    JISKO LOOTA THA UJAALON NE........

    KYA KHUB KAHI AAPNE YE SHE'R AUR SATH ME PURI GAZAL HI... KAHIB KAHIB BYANGSWAROOP BHI LAGI... MUKAMMAL KAFIA AUR BAHARE RAMAL PE KASI HUI YE GAZAL .KHUB RAHI ...

    DHERO BADHAAEE SAHIB...

    ARSH

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  3. बहुत गहरी बात कह दी आपने इस रचना में. बहुत शुभकामनाएं आपको.

    रामराम.

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  4. क्या ब्बात है गौतम साहब बहुत ही लाजवाब बात कही आपने! अहा! क्या ज़ेहनी लताड़ है। मान गए साहब।

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  5. कब पिटारी से निकल दिल्ली गए विषधर
    ये सियासत की बहस अब है संपेरों में
    ग़म नहीं शिकवा नहीं कोई ज़माने से
    ज़िन्दगी सिमटी है जब से चंद शेरों में

    गौतम भाई...क्या कहूँ...ग़ज़ब के शेर कहे हैं आपने...बेहतरीन...इस उम्र में ये सोच...सुभान अल्लाह....शेरो-शुखन की दुनिया आप के अशआरों से लम्बे वक्त तक आबाद रहे ये ही दुआ करते हैं...
    नीरज

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  6. सुबह की दौड़ से ये थक के भूले है हम
    लुत्फ़ क्या होता है अलसाये सवेरो में
    जब कोई फौजी कलम उठाता है .ओर इस तरह सवेरो को ढूंढता है .....खुदा कसम एक बरगी यकीन नहीं होता...पर जब वो ये कहता है
    "बंदिशे है अब से बाजो की उडानो पर
    सल्तनत आकाश ने बांटी बटेरो में "
    यकीन हो जाता है की कुछ तजुर्बे कलम में भी झलकते है ओर आम हालात से से दूर रहकर भी उसने आम जिंदगी को उसमे रहने वाले कई नुमाइंदो से बेहतर समझा है .....
    तुम बहुत अछे इन्सान हो.....इश्वर तुम्हे सलामत रखे.

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  7. गज़नियों का खौफ़ कोई हो भला क्यूं कर
    जब बँटा हो मुल्क ही सारा लुटेरों में
    .........
    bahut hi badhiyaa

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  8. एक एक शेर बहुत खूबी से कहा है आपने ..लाजवाब कर दिया आपने अपनी इस गजल से ..बहुत सुन्दर

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  9. हुज़ूर ! आदाब !!
    क्या कहूं ,,, कहाँ से शुरू करुँ,,,,
    बस फ़िदा हो जाने को दिल चाहता है ....
    एक-एक शेर अपनी कशिश का खुद एहसास
    करवा रहा है ....

    "जिसको लूटा था उजालों ने ........."
    भाई ,, मैं तो लाजवाब हूँ ....
    अब क्या मिसाल दूं मैं तुम्हारे ......

    ढेरों मुबारकबाद और शुभ-कामनाओं के साथ . . . .

    "भीड़ में गुम हो गये सब आपसी रिश्ते ,
    हर बशर अब क़ैद है अपने ही घेरों में...."

    ---मुफलिस---

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  10. सुभान अल्ला ..........
    इतनी जबरदस्त ग़ज़ल............

    अब न चोबारों पे वो गप्पें ..........
    आज के हालत का दर्द उबाह दिया है इस शेर मैं

    कब पिटारे से निकल दिल्ली गए विषधर.....
    आज के चुनावी माघोल पर सटीक प्रहार करती

    और सारे शेर भी कमाल के हैं गौतम जी, गुरु देव नें इस में औ रंग डाल दिया है

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  11. gautam ji baswah wah wah nikal rahi hai, kabhi kabhi tareef ke shabd itne kam pad jaate hain , behrareen aur lajawaab se bhi kaam nahin chal raha bas anupam rachna, har sher ek se badhkar ek.

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  12. बहुत ही सुंदर रचना गोतम जी घर शॆर इस गजल का बहुत ्कीमती लगा.अनमोल
    धन्यवाद

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  13. जिसको लूटा था उजालों ने यहाँ पर कल
    ढ़ूँढ़ता है आज जाने क्या अँधेरों में

    Behtreen hai bhai.......
    wah..wa

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  14. गौतम जी,
    मतला पढा,,अच्छा लगा,,,,,लेकिन बस अच्छा ही लगा,,,,

    और उसके बाद तो कह नहीं सकता के कौन सा शेर कितना अच्छा लगा,,,,हैरत से बस पढता ही चला गया ,,,,लौट लौट कर ,,,,,बसेरों और डेरों से ग़ज़ल का सफ़र शुरू कर के शेर दर शेर जो दास्तान कही,,,,,जो मंज़र दिखाए,,,एक से बढ़ कर एक,,,,काबिले तारीफ,,,,,,

    ग़ज़ल का ताज़ा पन भी साफ़ नज़र आ रहा है,,,
    बाकी डायरी के पुराने पन्नों का भी इन्तेज़ार,,
    सलाम आपको,,,

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  15. antim sher to hamari bhi haquikat hai gautam sir.

    aur waise poori ghazal hi acchi hai...
    Khaskar nimn sher (Samayik muddon pe likhe sher mujhe sadev pasand aate hain):

    kab pitari se nikal dilli gaye vishdhar,
    ye siyasat ki behas ab hain saperon main

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  16. क्या बात है भाई. बहुत खूब.

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  17. कैप्टन साहब,
    मैंने आज तक आपकी जितनी भी गजल पढी है ये उन सब में सबसे अच्छी गजल है
    हर शेर लाजवाब है
    ९ शेर है अआपकी गजल में मगर ये नहीं समझ आ रहा की किस शेर को सर्वशेष्ठ कहाँ जाये सभी एक से बढ़ कर एक हैं

    वीनस केसरी

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  18. गौतम भाई सैल्यूट करता हूं आपको।

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  19. ... गजल का प्रत्येक शेर प्रभावशाली है, बेहद खूबसूरत अभिव्यक्ति।

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  20. kya baat he goutamji..
    L A A Z A V A A B
    gazal...

    gam nahi.....
    zindgi simti he jab se chand shero me...
    sach he.."is" duniya me aakar kise gam hoga, shikva hoga..jab kalam aour syahi ke sang maa sarsvati ho..

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  21. क्या बात है गौतम। हमेशा की तरह ही...बड़े नायाब शेर कहे हैं तुमने। आख़िरी शेर तो लाजवाब है

    ग़म नहीं....वाह!

    अगली पेशकश के इंतज़ार में-

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  22. विश्वास नहीं होता है कि इतनी सुंदर शायरी भी हो सकती है . इन रचनाओं पर 'गुरु' पंकज जी की स्पष्ट छाप है. काश ऐसे गुरु की छाया हम लोगों को भी नसीब होती.

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  23. हर शेर अपने आप में एक अलग रूप लिए है..
    सभी बहुत अच्छे लगे..किसी एक का पक्ष लेना सही न होगा.
    अगली पेशकश का इंतज़ार रहेगा.
    'चंद लफ्जों में सिमट कर रह गयी है जिंदगी...हाल पर अपने तरस तो अब मुझे आता नहीं!

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  24. गौतम जी, क्या बात है! प्रशंसा को शब्द नहीं मिल रहे! गजब के शेर हैं। गुरू जी की सीख रंग ला रही है।

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  25. bahut badhiya. agar font size thoda bada kar den to padhne m aasaani hogi...

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  26. इस सुन्दर गजल के लिए साधुवाद.

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  27. Har She'r achcha hai, achchi Gazal.

    "subah ki is daud mein .."
    "dekh lee tasveer...."
    "ab na chaubaare pe ..."
    Yeh teen She'r bahut pasand aaye.

    God bless
    RC

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