Showing posts with label जावेद अख्तर. Show all posts
Showing posts with label जावेद अख्तर. Show all posts

18 March 2009

दीवारें हम बनेंगे माँ, तलवारें हम बनेंगे माँ.....

देहरादून को विदा कहने का वक्‍त आ गया। ये आखिरी पोस्ट है उत्तराखंड की इस मनोरम वादी से। तो आज आपका परिचय करवाता हूँ एक अनूठे गीत से। इस गीत के बोल और धुन पर भारतीय सैन्य अकादमी से पास-आउट होने वाले भारतीय सेना के समस्त जांबाज आफिसर कदम-से-कदम मिलाते हैं और वतन पर मर-मिटने की सौगंध लेते हैं। गीत को जावेद अख्तर साहब ने अपने शब्द दिये हैं और धुन पे सजाया है राजु सिंह व अनु मलिक जी ने। अकादमी में प्रशिक्षणरत लगभग सोलह सौ जेंटलमैन कैडेट्‍स जब इस गीत को अपनी बुलंद आवाज़ में गाते हुये ड्रम की थाप पर कदम मिलाते हुये परेड करते हैं, तो मजाल है कि किसी के जिस्म का रोआं-रोआं न खड़ा हो जाये और वो नजारा तो शब्दों की वर्णन-क्षमता से परे होता है। चाहता तो था कि आप सब को इस गीत की रिकार्डिंग भी सुनवाऊँ, किंतु वो फिर कभी। फिलहाल इस गीत के बोल पढ़वाता हूँ:-











...इति। अगला पोस्ट मुल्क के सुदूर उत्तरी कोने से लिखना होगा। तब तक के लिये विदा।