10/03/10

यक़ीं कीजे, ये मैं ही हूँ, जरा फोटो पुरानी है

छुट्टियाँ कब बीत जाती हैं, पता भी नहीं चलता। ड्युटी पर आये हुये ये चौथा दिन और फिर से वही अहसास कि जैसे यहीं हूँ सदियों से। सतरह सालों बाद इस बार उपस्थित हो पाया था होली पर अपने गाँव में और क्या खूब होली जमी। अबके इधर कश्मीर में खूब-खूब बर्फ गिरी है...ग्लोबल वार्मिंग की तमाम धमकियों को धता बताते हुये। एक तरफ झेलम की हँसी छुपाये नहीं छुप रही तो दूसरी तरफ चिनारों के अट्टहास गुंजायमान हैं वादी के कोने-कोने में। यूं चंद सिरफिरों की उन्मादी हरकतें खलल डालती हैं बीच-बीच में वादी के इस हर्षोल्लास में, किंतु मुस्तैद हरी वर्दियाँ ज्यादा देर टिकने नहीं देती हैं इस खलल को।

...और इन समस्त व्यस्तताओं के मध्य मुझसे अपने प्रिय ब्लौगरों के कई पोस्ट छूट गये हैं। पकड़ता हूँ धीरे-धीरे सब "छूट गयों" को। फिलहाल आज की बात कि दिन खास है आज का। दिन बहुत खास है कि मेरे प्रिय शायर का जन्म-दिन है ये। कुमार विनोद का जन्म-दिन । वैसे पता तो ये भी चला है कि आज ही के दिन मैं भी पैदा हुआ था अहले सुबह करीब दस हजार साल पहले। लेकिन हम "पाल ले इक रोग नादां के..." के इस पन्ने पर मनायेंगे कुमार विनोद की सालगिरह उन्हीं की एक बेहतरीन ग़ज़ल गुनगुनाकर। आइये गुनगुनाते हैं उनकी लाजवाब बिम्बों और अनूठे अंदाज वाले शेरों से सजी इस ग़ज़ल को:-

कभी लिखता नहीं दरिया, फ़क़त कहता ज़बानी है
कि दूजा नाम जीवन का रवानी है, रवानी है

बड़ी हैरत में डूबी आजकल बच्चों की नानी है
कहानी की किताबों में न राजा है, न रानी है

कहीं जब आस्माँ से रात चुपके से उतर आये
परिंदा घर को चल देता, समझ लेता निशानी है

कहाँ जायें, किधर जायें, समझ में कुछ नहीं आता
कि ऐसे मोड़ पर लाती हमें क्यों जिंदगानी है

बहुत सुंदर से इस एक्वेरियम को गौर से देखो
जो इसमें कैद है मछली,क्या वो भी जल की रानी है

घनेरे बाल, मूँछें और चेहरे पर चमक थोड़ी
यक़ीं कीजे, ये मैं ही हूँ, जरा फोटो पुरानी है


...अपने गाँव से पटना की ट्रेन यात्रा के दौरान "शुक्रवार" पत्रिका के नये अंक को पलट कर देख रहा था तो नजर पड़ी कुमार विनोद की ग़ज़ल-संग्रह "बेरंग हैं सब तितलियाँ" {जिसकी चर्चा मैं कुछ दिनों पहले
यहाँ कर चुका था} की समीक्षा पर। अच्छा लगा देखकर...बहुत अच्छा लगा देखकर कि ग़ज़लों की बात हो रही है अच्छी पत्र-पत्रिकाओं में। कुमार विनोद जैसे शायर हों अपने आस-पास तो ग़ज़ल का भविष्य वैसे भी सुरक्षित दिखता है।

86 टिप्पणियाँ:

मनोज कुमार said...

बड़ी हैरत में डूबी आजकल बच्चों की नानी है
कहानी की किताबों में न राजा है, न रानी है
वैसे तो पूरी ग़ज़ल बेहद पसंद आई। पर यह शे’र दिल को छू गया।
जन्म दिन की बधाई और शुभकामनाएं।

विनोद कुमार पांडेय said...

गौतम जी गाँव की माटी में ही कुछ जादू है जो सभी को आकर्षित करता है...कुमार विनोद जी की खूबसूरत ग़ज़ल की प्रस्तुति के लिए धन्यवाद..और कुमार विनोद जो को जन्मदिन की बधाई

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

किसी का जन्मदिन मनाने का यह शानदार तरीका है। गज़ल बहुत सुंदर है, ऐसी कि परात में भरे पानी में तैरती कागज की बत्तख।

कंचन सिंह चौहान said...

उन्हे भी जन्मदिन की बधाई.....!!

और आपके लिये दुआएं लंबी उम्र की, लोगों के दिलों पर राज़ करने की, हर दिल अज़ीज बने रहने की... ब्लॉग जगत और अखिल जगत के हीरो बने रहने की... एक अच्छा शायर बने रहने की... एक सच्चा फौजी बने रहने की और इन सबसे ज्यादा मेरा वीर बने रहने की......!

MANY MANY HAPPY RETURNS OF THE DAY

बेचैन आत्मा said...

कभी लिखता नहीं दरिया, फ़क़त कहता ज़बानी है
कि दूजा नाम जीवन का रवानी है, रवानी है
...अच्छी गज़ल का बेहतरीन शेर.
जन्म दिन की ढेर सारी बधाईयाँ..आपको भी और आपके प्रिय शायर को भी.
...आपकी पोस्ट का वाकई इंतजार था.

निर्मला कपिला said...

बड़ी हैरत में डूबी आजकल बच्चों की नानी है
कहानी की किताबों में न राजा है, न रानी है

कहीं जब आस्माँ से रात चुपके से उतर आये
परिंदा घर को चल देता, समझ लेता निशानी है
शेर दिल को छू गये।
गज़ल बेहद पसंद आयी कुमार विनोद जी को ाउर आपको जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई और पुस्तक प्रकाशन की भी। आपका ये जज़्बा और लिखने का अन्दाज़ यूँ ही बना रहे। खुशहाल जिन्दगी और लम्बी उम्र के लिये दुआयें। बहुत बहुत आशीर्वाद।

Udan Tashtari said...

कुमार विनोद जी से बेरंग हैं सब तितलियाँ प्राप्त हुई थी...बेमिसाल संग्रह है गज़लों का...


कुमार विनोद जी को जन्म दिवस की बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएँ...


आपको भी अनेक बधाईयाँ एवं शुभकामनाएँ...१०००० बीते हैं और १०००००० और जन्म दिवस ऐसे ही आयें..

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

बड़ी हैरत में डूबी आजकल बच्चों की नानी है
कहानी की किताबों में न राजा है, न रानी है

कहाँ जायें, किधर जायें, समझ में कुछ नहीं आता
कि ऐसे मोड़ पर लाती हमें क्यों जिंदगानी है

घनेरे बाल, मूँछें और चेहरे पर चमक थोड़ी
यक़ीं कीजे, ये मैं ही हूँ, जरा फोटो पुरानी है

गौतम जी, लाजवाब कलाम, खूबसूरत अंदाज
कुमार विनोद साहिब और आपको बधाई
जन्मदिन ढेर सारी शुभकामनाएं...

Dr. Smt. ajit gupta said...

आपको जन्‍मदिन पर ढेरों बधाइयां। बेहतरीन गजल पढ़ाने के लिए भी बधाई। आपका लिखा हम रोज पढ़ते रहे बस यही कामना है।

वन्दना said...

gautam ji
janamdin ki aapko aur vinod ji ko hardik shubhkamnayein.

ti kavi ho ya sainik
dhar banaye rakhna
hosle buland rakhna
aage hi badhte rahna

Kishore Choudhary said...

तारीफ करने का आपका हौसला बना रहे

दोनों को जन्म दिन की शुभकामनाएं .

खुशदीप सहगल said...

आपको और कुमार विनोद जी को जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई...

जय हिंद...

दिगम्बर नासवा said...

गौतम जी ग़ज़ल तो कमाल की है ... कितने दिलकश अंदाज़ में शेर कहे हैं ....
आप विनोद जी के बहाने अपना जनम दिन छुपाए हुवे हो ... ये ग़लत बात है .... आपको बहुत बहुत बधाई ... मुझे तो आज भी आपका हंसता हुवा चेहरा ... खुला व्यक्तित्व ... सादपन याद आता है .... देहरादून की छोटी सी मुलाकात लंबी यादगार बन गई है ...... भगवान से प्रार्थना है उनको लंबी आयु और सदा खुश रखे ....

अनिल कान्त : said...

आपको और कुमार विनोद जी को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएँ....

हेमन्त कुमार said...

गजल अच्छी लगी । पढ़वाने के लिये धन्यवाद ।
आप दोनो को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनायें ।
आभार..!

डॉ .अनुराग said...

के आप भी मार्च में उतरे
हजूर की मेहरबानी है ......

जर्रानवाजी ..मेरी जान ....गोया के सुबह सुबह कम्पयूटर खोला तो पता लगा के एक पार्टी ओर ड्यू हो गयी.....लो जी..... कसम उस इंडेक्स फिंगर की जिसे आजकल मुड़ने में थोडा आलस आता है .....जरा जोर आज़माइश करो भाई.....वर्ना अंग्रेज उससे कुछ गलत इशारा समझ लेगे .........
खैर हम तो यही दुआ करते है के ...कितने साल गुजरे आपके भीतर के इंसान में मौजूद ज़ज्बे ...ये मिजाजी .....ये हंसी ......किसी बच्चे सी मासूमियत की तरह कभी बड़े न हो ....
कुछ कोमीक्स ढूँढने निकलता हूँ.......आखिर पार्टी के वक़्त गिफ्ट भी देना होता है ...

रचना दीक्षित said...

इतनी बढ़िया ग़ज़ल पढ़वाने के लिए आभार. एक एक शेर बेमिसाल है. घाटी का हाल सुन कर भी अच्छा लगा श्रद्धेय विनोद जी और आप दोनों को जन्मदिवस की अनगिनत बधईयाँ और हमारा सन्देश उन तक पहुंचा भी दीजियेगा.
आभार

रंजना [रंजू भाटिया] said...

बहुत खूब लिखी है आपने गजल .....जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई

सागर said...

मुबारक... तीन जन्मदिन हैं आज मेरे गिरफ्त में, एक हमारे पटना में, कुणाल (पूजा) का और आपका... हम पार्टी के लिए कहाँ - कहाँ जाएँ !!!!!!

Arvind Mishra said...

जन्म दिन की शुभकामनाएं !

सुलभ § सतरंगी said...

कुमार विनोद साहब और आपको सुबह एक साथ याद किया...
शुक्र है के मेरे पास कुमार साहब की "बेरंग है सब तितलियाँ.." है वहीँ से जन्मतिथि देखकर आप दोनों शायर को विश कर पाया...

ग़ज़ल तो लाजवाब है. आपकी नयी ग़ज़ल का क्या हुआ...? उम्मीद है अगले पोस्ट में...

रश्मि प्रभा... said...

कहाँ जायें, किधर जायें, समझ में कुछ नहीं आता
कि ऐसे मोड़ पर लाती हमें क्यों जिंदगानी है
......yahi hai zindgani

rashmi ravija said...

बहुत सुंदर से इस एक्वेरियम को गौर से देखो
जो इसमें कैद है मछली, वो भी क्या जल की रानी है
इतनी खूबसूरत ग़ज़ल पढवाने का बहुत बहुत शुक्रिया....
आप दोनों को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं...

shikha varshney said...

जनम दिन मनाने का बेहतरीन तरीका अपनाया है आपने ...आप दोनों को अनगिनत शुभकामनाये..ग़ज़ल बेमिसाल है बहुत शुक्रिया

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

बहुत खूब. जन्म दिन की बधाई.

नीरज गोस्वामी said...

गौतम जी वाह...क्या ग़ज़ल पढवाई है...कुमार जी की इस किताब के बारे में मैंने भी लिखा है जिसे आप इस महीने के आखिर में पढ़ पाएंगे...यकीनन वो कमाल के शायर है...होली पर आप घर गए थे जान कर बहुत ख़ुशी हुई...अपनों को रंगने का लुत्फ़ ही कुछ और होता है...आप और विनोद जी को जनम दिन की ढेरों शुभ कामनाएं...
नीरज

राकेश कौशिक said...

आपको और कुमार विनोद जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई.

सुशील कुमार छौक्कर said...

वाह इस बार होली अपने गाँव। वाह जी वाह। बिल्कुल जी आज का दिन खास है। इसलिए कुमार विनोद और आपको जन्मदिन की मुबारकबाद। इस खास दिन खास गजल पढवाई है।
कहाँ जायें, किधर जायें, समझ में कुछ नहीं आता
कि ऐसे मोड़ पर लाती हमें क्यों जिंदगानी है

खूबसूरत शेर। वैसे शीर्षक देखकर पुरानी फोटो देखने की ललक हो गई है। कभी मौका मिला तो दिखाईएगा।

Ankit Joshi said...

कुमार विनोद जी को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनायें.
ग़ज़ल का हर शेर उम्दा है,
क्या कहा आज आपका भी जन्मदिन है..........चलिए आपको भी जन्मदिन की बधाई हो (हा हा हा)
आप सदैव खुश रहें और चमकते दांतों की चमक कभी फीकी ना पड़ने पाए.

neera said...

एक्वेरियम देखते ही अब विनोदजी और गौतमजी नज़र आयेंगे...:-)

बहुत सुंदर से इस एक्वेरियम को गौर से देखो
जो इसमें कैद है मछली, वो भी क्या जल की रानी है...

अमिताभ श्रीवास्तव said...

shukravaae, kaa shukraguzaar hoo, aapko gazal sambandhit thodi sa sukh milaa ki patrikaao me gazal ko nazar kiya jaa rahaa he..kher../ holi par apne gaanv ki mahaq..aour kumarji ki gazalo kaa sanidhya..behatreen he../ aapke aanand ko anubhav kar rahaa hu, aour aapke saath fir se holi bhi khel rahaa hu.

अमिताभ श्रीवास्तव said...

* shukravaar
*thoda sa
in shbdo ko sudhar kar padhhe

sanjay vyas said...

बहुत नाइंसाफी है सीधे सीधे हमें दस हज़ार छः साल का बता रहे हैं:)

भरपूर-अनाप शनाप-ढेरों शुभकामनाएं.बधाइयां.

कुमार जी को भी सादर शुभकामनाएं.

श्रद्धा जैन said...

waah bahut sunder gazal padhwaayi hai aapne ....

Janamdin par hardik shubhkamana

HARI SHARMA said...

मुबारक हो तुम्हे ये दिन
हज़ारो साल तक महको
जिसे हम रूप कहते है
वो तो आन्खो का पानी है

अजय कुमार झा said...

यार मेजर मुझे तो लगता है तुम दिल से इत्ते शायराना हो चुके हो कि दुशमन को शहीद करके उस पर भी कोई शेर गजल कह डालोगे ....हा हा हा ..शुभकामनाएं भाई हमारी तरफ़ से ......
अजय कुमार झा

singhsdm said...

बहुत सुंदर से इस एक्वेरियम को गौर से देखो
जो इसमें कैद है मछली, वो भी क्या जल की रानी है
जन्म दिन की ढेर सारी बधाईयाँ..आपको भी और शायर को भी.
आप दोनों को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं...

प्रवीण पाण्डेय said...

घनेरे बाल, मूँछें और चेहरे पर चमक थोड़ी
यक़ीं कीजे, ये मैं ही हूँ, जरा फोटो पुरानी है

बहुत सुन्दर पंक्तियाँ हैं ।

कार्तिकेय मिश्र (Kartikeya Mishra) said...

@वैसे पता तो ये भी चला है कि आज ही के दिन मैं भी पैदा हुआ था अहले सुबह करीब दस हजार साल पहले

अब ये सूत्र क्या है मेजर साब, कस्सम से अगर ये पुरानी फोटो है, तो दस हजार साल पहले गोया जवानी में क्या कहर लगते होंगे..! अल्हम्दुलिल्लाह

आपकी बंदूक और कलम, दोनों में ऐसा ही बेसाख्ता दम बना रहे.. शुभकामनायें, जियो हजारों साल और..!

आपके प्रिय कवि को भी जन्मदिन की शुभकामनायें

कार्तिकेय मिश्र (Kartikeya Mishra) said...

अगर ग़ज़ल की तारीफ में कुछ कहने को बचा हो, तो मेरी तारीफ भी शामिल कर ली जाये

सिद्धार्थ प्रियदर्शी said...

लाजवाब !!! मज़ा आ गया गौतम सर !!

कभी लिखता नहीं दरिया, फ़क़त कहता ज़बानी है
कि दूजा नाम जीवन का रवानी है, रवानी है

इस शेर ने मन को छू लिया...

जन्मदिन कि हार्दिक शुभकामनाएँ...ईश्वर आप को दीर्घायु करें...

Shefali Pande said...

janmdin kee shbhkaamnae.....

रंगनाथ सिंह said...

जन्मदिन की बधाई।

"अर्श" said...

दोनों ग़ज़लकारों को दिल से बधाई...


अर्श

ताऊ रामपुरिया said...

आप दोनों को जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाएं.

रामराम.

Manish Kumar said...

वाह भाई विनोद जी की बड़ी प्यारी ग़ज़ल पढ़ाई आपने अपने जन्म दिन पर। कमाल के शेर थे सारे के सारे।

दीपक 'मशाल' said...

मेजर गौतम को माइनर 'मशाल' की तरफ से वर्षगाँठ मुबारक हो..
Gazal ke bare me mat poochhna.. kya karoon main jhooth bolta nahin aur aap hamesha gazab dhaate hain..
जय हिंद...

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

जन्म दिन की बधाई और शुभकामनाएं!

venus kesari said...

गौतम जी जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

बहुत सुंदर से इस एक्वेरियम को गौर से देखो
जो इसमें कैद है मछली, वो भी क्या जल की रानी है

घनेरे बाल, मूँछें और चेहरे पर चमक थोड़ी
यक़ीं कीजे, ये मैं ही हूँ, जरा फोटो पुरानी है

मूछो वाले गौतम जी से मिलाने की ईच्छा है.. मिलावाईयेगा ना ?

आपका वीनस केशरी

neelam said...

पोस्ट तो पूरी करनी थी न ,एक फोटो भी पुरानी कॉलेज के जमाने की चस्पा कर देते मूंछों वाली
anyway जन्मदिन की मुबारकवाद आप दोनों को

काजल कुमार Kajal Kumar said...

इतनी सुंदर ग़ज़ल पढ़वाने के लिए आपका धन्यवाद.

अल्पना वर्मा said...

बड़ी हैरत में डूबी आजकल बच्चों की नानी है
कहानी की किताबों में न राजा है, न रानी है

bahut hi umda gazal padhwayee!

***aap ko aur Kumar vinod ji ko Janamdin ki bahut bahut badhayee....

[Title padh kar laga tha ki sach mein aap ke bachpan ki photo dekhne ko milengee yahan.]

अर्कजेश said...

कुमार विनाद जी की सरलता मार डालती है । किस सरलता से सब कुछ कह जाते हैं । बधाई ...

बहुत सुंदर से इस एक्वेरियम को गौर से देखो
जो इसमें कैद है मछली, वो भी क्या जल की रानी है

वन्दना अवस्थी दुबे said...

कुमार विनोद की गज़ल की क्या तारीफ़ करूं? और उससे भी ज़्यादा , आपके तारीफ़ करने के अन्दाज़ की? खुले दिल से किसी और की तारीफ़ कितने लोग कर पाते हैं?
जन्मदिन पर बहुत-बहुत शुभकामनायें.

अपूर्व said...

पार्टी चालू आहे...!! वैसे शीर्षक देख कर पहले यही लगा कि जिंदगी के किसी ताख पर रखे एक पुराने श्वेत-श्याम एल्बम की धूल झाड़ी गयी है..मगर पता चला कि गज़ल के बहाने सालगिरह के सेलेब्रेशन चल रहा है..कुमार विनोद साहब को बहुत बहुत मुबारकबाद..वैसे अगर बात कन्फ़र्म हो गयी हो तो हम भी आपको मुबारकबाद दे दें..वैसे भी दस हजार साल पुराने एविडेंसेज्‌ तो म्यूजियम मे सहेजने लायक चीज होते हैं ;-)
खैर सालगिरह के मुबारक मौके पर आपको बहुत-बहुत ढेर सारी मुबारकबाद..और ऊपरवाले को भी शुक्रिया जिसने एक अजीम शख्सियत से हमारा भी तअर्रुफ़ कराया...
उम्मीद है छुट्टियाँ मजेदार रही होंगी..
केक भेजे जाने का इंतजाम हो..;-)

रंजना said...

जन्मदिन की अनंत शुभकामनाएं आपको और आपके हमारे पूज्य प्रिय शायर को....
नायाब चीज पढवाई आपने....बहुत बहुत आभार....

अभिषेक ओझा said...

पीडी से आपकी मुलाकात के बारे में पता चला था. अच्छा वक्त तो जल्दी निकल ही जाता है. मैंने एक बार पोस्ट लिखी हती पुण्य ख़त्म हुआ और ऑफिस वापस आना पड़ा :)
कुमार विनोद जी को जन्मदिन की शुभकामनायें. लगता है एक बार एक सम्मलेन में सुना है उन्हें ! डाउट है थोडा.

गिरीश बिल्लोरे ''पॉडकास्टर'' said...

sundar gazal

दर्पण साह 'दर्शन' said...

घनेरे बाल, मूँछें और चेहरे पर चमक थोड़ी
यक़ीं कीजे, ये मैं ही हूँ, जरा फोटो पुरानी है


"वक्त के हाथों में सबकी तकदीरें हैं,
आइना झूठा है सच्ची तस्वीरें हैं."
आपके यकीन पे हमें (यकीन कीजये) यकीन है...
..इसलिए तो 'हमउम्र' वाला आरक्षण हट गया.
वैसे
वो कौन है जो बूढ़ा होना चाहते हैं?
यहाँ तो बचपन के कई खेल अभी बाकी हैं.
(Original copyright:Gautam Rajrishi/ wo kaun hai jinhein tauba...)


कहीं जब आस्माँ से रात चुपके से उतर आये
परिंदा घर को चल देता, समझ लेता निशानी है

क्या कुछ चीजें स्कूल से इतर भी सीखी जा सकती हैं?
क्या जीने के लिए जानना ज़रूरी है?


बहुत सुंदर से इस एक्वेरियम को गौर से देखो
जो इसमें कैद है मछली, वो भी क्या जल की रानी है.


शेर अगर पिंजरे में भी रहे तो वो रहता तो शेर ही है पर राजा कि पदवी छिन जाती है, शायर बन जाता है, बांग्लादेश रहता है.

दर्पण साह 'दर्शन' said...

Happy Birthday To You Gautam Dajyu.

बहाना आज ऐसा है कि साक़ी(बीवी) मान जाएगी,
कि गौतम आज हमको भी तेरी बड्डे मनानी है.


(ह्म्म्मम्म... लगता है नज़्म उलझी है फ़िर relaunch करना पड़ेगा.)

'अदा' said...

आपको और कुमार विनोद जी को जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई...

अनूप शुक्ल said...

वाह! वाह!जी। हैप्पी बड्डे हो लिया। बधाई! गजल शानदार है।

dimple said...

belated happy b;day.may god bless u..

Kusum Thakur said...

प्रिय गौतम ,
तुमको और श्री विनोद जी को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं और बधाई !!

Anonymous said...

जन्मदिवस की शुभकामनाओं एवं ग़ज़ल पसंद करने के लिए आपका सभी का हार्दिक धन्यवाद . गौतम राजरिशी जी का विशेष आभार मेरी रचनाओं को आप सभी तक पहुँचाने के लिए . जन्मदिवस की बधाई मैं उनको फोन पर पहले ही दे चुका हूँ . कुमार विनोद

कुमार विनोद said...

जन्मदिवस की शुभकामनाओं एवं ग़ज़ल पसंद करने के लिए आपका सभी का हार्दिक धन्यवाद . गौतम राजरिशी जी का विशेष आभार मेरी रचनाओं को आप सभी तक पहुँचाने के लिए . जन्मदिवस की बधाई मैं उनको फोन पर पहले ही दे चुका हूँ . कुमार विनोद

रविकांत पाण्डेय said...

फ़िर तो दस मार्च का दिन स्पेशल हो गया शायरों के लिये! दोनों गुणीजनों को जन्मदिन की अनंत शुभकामनायें।

अरे! गज़ल सिर्फ़ एक शायर की ही क्यों लगी है?? माना कि केक खाने में बिजी होंगे लेकिन इसका ये मतलब थोड़े ही है कि हमें सस्ते में निबटा दें!!!

इस्मत ज़ैदी said...

गौतम जी बहुत सुंदर रचना पढ़्वाई आपने ,धन्यवाद

बहुत सुंदर से इस एक्वेरियम को गौर से देखो
जो इसमें कैद है मछली, वो भी क्या जल की रानी है

कुमार साहब को और आप को बहुत बहुत बधाई

Anil Pusadkar said...

गौतम भाई दो दिन दूर रहा नेट से इसलिये देर से इधार आया।आपको और विनोद जी को जन्म दिवस की बहुत बहुत बधाई।ईश्वर आपको शतायू करे चिरायू करे,हर बुरी नज़र से बचाये और हर बला से भी।एक बार फ़िर बहुत बहुत बधाई।आज रात आपके नाम रोज़ का जश्न मना लेंगे हम्।

कुश said...

बधाई तो फेंकी दी थी आपके फोन पर.. इधर वादियों की मुस्तैदी अच्छी लगी.. और झेलम की मुस्कराहट ने अनायास लबो पर हसी ला दी.. कुमार साहब की ये ग़ज़ल तो दिल ले गयी.. कोई एक शेर पकड़ नहीं सकता.. सारे ही क़यामत.. "रवानी है, रवानी है" ने तो तबियत बना दी.. बस मज्जा ही आ गया..

Puja said...

हम तो फोटो देखने आये थे...दिखी नहीं, लगाइए न प्लीज. :)
और आपका जन्मदिन तो मैं अब किसी साल भूलने से रही, अगले दस हजारों टाइप सालों तक :)

शरद कोकास said...

सौ साल देर से ही सही आपको दस हज़ारवी सालगिरह की बधाई । आज इस अवसर पर आपकी छुट्टियों से वापसी की खुशखबरी के साथ कुमार विनोद की यह गज़ल पढ़ ली
और पत्रिकाओं में गज़लें भेज रहे हैं या नहीं ? वहाँ भी आपके बहुत से पाठक हैं जो आपके नहीं हमारे सम्पर्क में हैं ।

MUFLIS said...

हमीं करें कोई सूरत
उन्हें बुलाने की
सुना है उनको तो आदत है
भूल जाने की.....

जन्म दिन मुबारक हो मेजर साहब !!

Anonymous said...

:)

Anonymous said...

:)
:):)

Anonymous said...

:)))

Anonymous said...

:))))
:)

manu said...

'
आपको और कुमार विनोद जी को जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई...

manu said...

कुमार साहिब के प्रशंषक तो हम पहले दिन से ही हो गए थे...
पहले ही दिन उनसे बात भी हो गयी थी....

बस हैप्पी बर्थडे न उनसे कह पाए..
ना ही ढंग से आपसे...

उस दिन सब कुछ इतना व्यस्त था..आपका भी हमारा भी और उन साहब का भी..जिन्होंने पूछा था...
कोई मैसेज देना है...?

बस मुस्कुरा कर इतना ही कहे थे..
के मेज़र को हैप्पी बर्थडे कह दीजिएगा..
प्यार से...

:)

लाजवाब मतले के बाद..
हुस्ने-मतला...
बड़ी हैरानी में डूब कर पढ़ रहे हैं...

कहीं जब आस्माँ से रात चुपके से उतर आये
परिंदा घर को चल देता, समझ लेता निशानी है

एक अजीब कैफियत दे रहा है...
बहुत प्यारी ग़ज़ल...

manu said...

और हाँ...
ये हमारा सातवाँ कमेन्ट है ...
पहले चार सुन्दर सी मुस्काने भी हमारी ही हैं......
उस वक़्त सिर्फ मुस्कुराने का मन था....

कुछ लिखने पढने का नहीं....

Shardula said...

प्रिय गौतम, जीवन का नया साल बहुत-बहुत शुभ हो! आपसे बात हुई लम्बी सी, उसी की खुशी मन को भिगोती रही. आपकी नयी पोस्ट आयी है, ये देख तो उसी दिन लिया था, पर वो लम्हा नहीं मिल पाया वक्त से कि इसके साथ justice कर सकूँ , सो आज तक इंतज़ार किया... पढ़ने और लिखने के लिए. आप बहुत ही बहता हुआ सा, मीठा सा लिखते हैं प्यारेलाल! बहते दरिया की तरह मन को भिगाते जाते हैं आपके शब्द!
... सोच रही हूँ कि जब आप इतने खुश हुए होली पे गाम में, तो माँ कितना खुश हुई होंगीं !! ओह!
... गौतम, ये चिनार के हरे पेड़ भी हरी वर्दी डाले, तने हुए, तैनात से सिपाही दीखते हैं क्या ?
... ये दस हज़ार साल पहले वाली बात आपने फोन पे भी कही थी, आज यहाँ भी पढ़ रही हूँ :) जानते हैं आज से 10,000 years ago would be around 7990 B.C. Man was a hunter gatherer nomad then. Can imagine you coming out of a cave with a song (rather just a beat...no words:) in your heart and skip in your step :) :) जियो!!
... आ. विनोद जी को जन्मदिवस की belated शुभकामनाएं. उनकी गहरी-गहरी सी इस ग़ज़ल के लिए भी उन्हें बधाई. परिंदे वाली बात बहुत ही प्यारी लगी...
हर शेर में एक objective सा observation है, हल्का सा दर्द है... शायद खूबसूरती इसमें है कि कुछ भी overdo नहीं किया है...
... प्यारेलाल अब अंत में फ़िर से आपको ढेर सी आशीष, आप सुन्दर जियें, सुन्दर रचें.
विजयी भव:
शार्दुला दीदी

योगेश स्वप्न said...

aabhaar.

आनन्द वर्धन ओझा said...

राजऋषिजी,
देर से ही सही, जन्मदिन की शुभ-कामनाएं आपको और शायर विनोदजी को भेजता हूँ ! स्वीकार करें ! बेहतरीन ग़ज़ल है, खूब पसंद आयी. 'हैरत में नानी' और 'जल की रानी' जैसे बिम्ब अचम्भित करते हैं, मुतासिर करते हैं ! वैसे तो पूरी ग़ज़ल बहुत प्रभावित करती है, किन्तु इस शेर पर झूम जाता हूँ :
'कहाँ जायें, किधर जायें, समझ में कुछ नहीं आता
कि ऐसे मोड़ पर लाती हमें क्यों जिंदगानी है
!'
गाँव से कुछ अच्छी चीजें भी खाने को लाये हैं क्या ? दिल्ली में बैठा-बैठा उन परम शुद्ध सामग्रियों की कल्पना करके प्रसन्न हो लूंगा बन्धु !
सप्रीत--आ.

kshama said...

बहुत सुंदर से इस एक्वेरियम को गौर से देखो
जो इसमें कैद है मछली,क्या वो भी जल की रानी है
What a juxtaposition! Qaidme hai rani...

CS Devendra K Sharma said...

घनेरे बाल, मूँछें और चेहरे पर चमक थोड़ी
यक़ीं कीजे, ये मैं ही हूँ, जरा फोटो पुरानी है


kya baat hai sir.......bahut khoob!!

ज्योति सिंह said...

कहाँ जायें, किधर जायें, समझ में कुछ नहीं आता
कि ऐसे मोड़ पर लाती हमें क्यों जिंदगानी है
bahut khoosurat ,hame bhi samajh nahi aa raha kya kahe ?