गुरुजी के जन्म-दिवस पर उनकी एक सुलगती कविता

Sunday 11 October 2009

कोई पावन-सी सुबह ये...कोई पवित्र-सा दिन ये...कोई खास-सी तारीख ये- अक्टूबर 11 की । हाँ, खास-पवित्र-पावन...!!! हमारे उस्ताद, हमारे गुरूदेव श्रद्धेय पंकज सुबीर जी का जन्म-दिन। सोचा कैसे सेलेब्रेट करूँ इस दिन को...कैसे करूँ? हमारी बिसात क्या कि खुद दो लाईन रच सकूँ उनके लिये। फिर एक खजाने को खंगालने का विचार आया। उनकी लेखनी का खजाना। खजाने में बेतरतीब फैले हीरे-पन्ने-माणिक में से एक नायाब रत्‍न निकाल कर लाया हूँ आपसब के लिये- गुरूदेव के इस दिन-विशेष पर उनकी लेखनी से निकला एक अंगारा...उनके लिये समस्त शुभकामनाओं सहित कि साहित्य के इस जगमग ज्योति-पुंज की रौशनी एक प्रखर सूर्य बनकर पूरे जग को प्रकाशवान करें। ...तो आइये सुनते हैं पहले गुरूजी की ये अद्‍भुत कविता पहले उन्हीं की आवाज में:-


आवाज़ों पर लगे मौन के पहरे हैं

देखो तो सन्‍नाटे कितने गहरे हैं

देख रहे हैं सब कुछ, पर लाचारी से

लोग यहां के गूंगे हैं और बहरे हैं

तुम कहते हो अब आवाज़ उठाऊं मैं

किन्‍तु यहां किसकी ख़ातिर चिल्‍लाऊं मैं



चारों तरफ अंधेरी काली सांझ हुई

क्‍या करिये जब स्‍वयं रोशनी बांझ हुई

दिखती बाहर से तो बहुत उजाली है

किन्‍तु रोशनी अंदर से ये काली है

तुम कहते हो कोई दीप जलाऊं मैं

किन्‍तु बताओ आग कहां से लाऊं मैं



कोई कोलाहल है ना कोई शोर यहां

रातों के जैसी नीरव है भोर यहां

कोई प्रश्‍न नहीं उठता है आज कहीं

कैसे फिर विश्‍वास करूं सब मरे नहीं

तुम कहते हो राग प्रभाती गाऊं मैं

किन्‍तु सभी लाशें हैं किसे जगाऊं मैं



बिना रीढ़ की हड्डी के इन्‍सान हैं ये

अपनी ही ताकत से तक अन्‍जान हैं ये

कायरता को नाम दिया लाचारी का

क़त्‍ल कर चुके अंदर की चिंगारी का

तुम कहते हो हलचल कोई मचाऊं मैं

किन्‍तु तीलियां सीली क्‍या सुलगाऊं मैं



सिर्फ प्रतीक्षा करती है अवतारों की

देखो कितनी भीड़ खड़ी लाचारों की

तेजी से चलते फिरते कुछ चेहरे हैं

दौड़ रहे हैं बाहर अंदर ठहरे हैं

तुम कहते हो जीना इन्‍हें सिखाऊं मैं

किन्‍तु कहीं इन जैसा ना हो जाऊं मैं

किन्‍तु कहीं इन जैसा ना हो जाऊं मैं...


पिछले साल उनके जन्म-दिन पर देहरादून की उस ओस से नहायी सुबह में मोबाइल पर हुई एक लंबी बातचीत याद हो आयी। कुछ तस्वीरें देखिये उनके पिछले जन्म-दिन की सीहोर में परिजनों संग मनी:-

मुबारक सालगिरह :-


माँ का आशिर्वाद :-


केक का आनंद :-


...और चलते-चलते सुनिये गुरूदेव की ही आवाज में उनकी एक ग़ज़ल:-


गुरूजी के इस दिन-विशेष पर कुछ बेहतरीन पोस्ट पढिये---गीतों के जादूगर राकेश खंडेलवाल का गुरूजी को समर्पित एक गीत ...जेरी बनी कंचन द्वारा उनकी "ईस्ट इंडिया कहानी" कंपनी की समीक्षा पढ़िये यहाँ और रवि ला रहा है गुरूदेव की जिंदगी के कुछ अनछुये पहलु एक अनूठी डायरी के जरिये और गुरूदेव की एक बहुचर्चित कहानी "महुआ घटवारिन" को पढ़ने के लिये यहाँ क्लीक करें।


पुनःश्च :-
उन्नीस दिन हो गये हैं इधर इस उजले-नीले लिबास में लिपटे हास्पिटल के इस बेड पर। सब ठीक है।...और सकून की बात ये है कि स्टिचेज खुल गये हैं। ढ़ेर सारे स्टिचेज के उन छोटे-छोटे काले धागों के खुलने की चुभन और तत्पश्चात का हल्कापन- अहा !!! उधर अर्धांगिनी का एक अजीब-सा हुक्म मिला कि मुझे स्टिचेज के इन तमाम काले धागों के टुकड़ों को और आपरेशन के बाद निकाले गये उस छोटे से बुलेट को संभाल कर रखना है उसके लिये...। मैं सोच में पड़ गया हूँ कि इस बार छुट्टी जाने पर कोई नई रेसिपीज तो नहीं बनेगी इनसे...!!!

50 टिप्पणियाँ:

"तुम कहते हो जीना इन्‍हें सिखाऊं मैं
किन्‍तु कहीं इन जैसा ना हो जाऊं मैं "..

इन पंक्तियों की सहज प्रभावान्विति के आगे नतमस्तक हूँ । पूरी रचना आत्यंतिक प्रभाव की सृष्टि करती है । पंकज जी को इतना नहीं पढ़ा । अब तो एक विचित्र सी उत्कंठा भर गयी है मन में ।
जन्मदिवस पर हार्दिक शुभकामनायें ।

ओह ! वह छोटी-सी बुलेट ! ....

गौतम भाई!
आप ने गुरुजी को बहुत शानदार तोहफा दिया है। गुरुजी को जन्मदिन की बधाई! बुलट संभाल कर जरूर रखिएगा और धागे भी जिन्होने बुलट की कारस्तानी को ठीक किया।

pankaj ji ko meri or se bhi janm dinki shubhkaamnayen preshit karen.

pankaj ji ki rachna vastav men anupam.

aapka swasthya sudhar raha hai, ishwar ka dhanyawaad.

'अदा' said...

Aapke gurudev ko unke janmdin ki anekon shubhkaamna...

गुरु जी शतायु हों.

कविता, कवि के वैभव को और ऊँचा करती है. आपके स्वस्थ होने की खबरें, सुकून बढाती हैं.
नई रेसेपी वाली पंक्तियाँ पढ़ कर लोटपोट हूँ... वाकई दिल बड़ा है आपका और भाभी, ज़िन्दगी को बड़े निरपेक्ष भाव से देखने का साहस रखती है. ये धागे के टुकडे जो आप समेट कर साथ ले जायेंगे, गवाह हैं लाख बार बिखर कर हज़ार बार जुडने के.

पंकजजी को जन्मदिन की मंगलकामनायें।
गोली का कोर्ट मार्शल होगा। उससे पूछा जायेगा -तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई हमारे इलाके में घुसने की।

गौतम भाई ,
शुक्रिया
इतनी असरदार कविता सुनवा दी
और ये भी बढिया खबर के
आप स्वस्थ हो रहे हैं

नारी मन की हर बात ऐसी ही होतीं हैं
गोली - से ताबीज़ बनाकर पहन लीजीयेगा :)

जिन्होंने आपको घायल किया
उन्हें ईश्वर कड़ी सजा देंगें
- पाप लगेगा उन्हें
आपके गुरूजी और
हमारे गुणी अनुज
भाई श्री पंकज जी को स स्नेह
साल गिरह की अनेकानेक बधाइयाँ
-- स स्नेह,
- लावण्या

बहुत ही उत्‍कृष्‍ट रचना को शिष्‍य के द्वारा सार्वजनिक कर स्‍मरण कराना निश्‍चित ही श्रेष्‍ठ शिष्‍य का कर्म है, आपको बधाई। हमारे लिए प्रसन्‍नता का विषय है कि आप स्‍वस्‍थ हो रहे हैं। दीवाली पर आप सभी फौजियों को हमारी शुभकामनाएं।

singhsdm said...

गौतम जी
ग़ज़ल पसंद करने का बहुत बहुत शक्रिया...आपने जिस अंदाज़ में ग़ज़ल की समीक्षा की है वो मेरे लिए दिशा बोधक है. जहाँ तक एक और इक वाली बात है आप दुरुस्त हैं चूँकि मैंने ग़ज़ल बगैर किसी इस्लाह के पोस्ट कर दी थी ....इस्लाह करने के बाद कुछ दुरुस्ती भी की है !
आपकी कविता अपने गुरु जी के लिए निश्चित ही भावपूर्ण और दिल को छु लेने वाली है....गुरु जी को जन्मदिन और आप जैसे चेले पाने की बधाई.
सिर्फ प्रतीक्षा करती है अवतारों की

देखो कितनी भीड़ खड़ी लाचारों की

तेजी से चलते फिरते कुछ चेहरे हैं

दौड़ रहे हैं बाहर अंदर ठहरे हैं
बहुत सुन्दर

Arvind Mishra said...

भाव बिह्वल कर गयी यह पोस्ट -गुरू के प्रति यह समर्पण -बंदऊ गुरु पद पदुम परागा .......
कविता भी जबरदस्त है ! अन्य लिंक्स भी देखता हूँ !
अब नारी मन का क्या कहें ? पर प्रणम्य है वह भी ! आप सा भाग्यशाली पाकर !

Udan Tashtari said...

पंकजजी को जन्मदिन की मंगलकामनाएँ.

आपका जज़्बा और आपका साहस...हल्के में बड़ी बात..नतमस्तक हूँ गौतम भाई. हजारों हजार शुभकामनाएँ आपको जाती हैं.

raj said...

aap achhe ho rahe hai sun ke achha lga....guru ke prati gahre adar or prem ko darsati hai apki post....unhe kanamdin ki shubkamnaye...or aap ke liye bhi dhero shubkamnaye...get well soon....

Apoorv said...

सुबीर जी को पहली बार पढ़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ..और कैसे कहूँ कि कितना आनंद आया..पढ़ कर खुद पे शर्म भी आयी..आखिर मै भी तो हूँ उसी भीड़ का हिस्सा..उनके लिये जन्मदिन की हार्दिक बधाइयाँ.
और गोली के कोई फ़ूल बनाने का इरादा तो नही है आपका? (सौ. राजेन्द्र यादव-कुल्टा) ;-)
जल्द ठीक होने की शुभकामनाओं सहित

लोग यहां के गूंगे हैं और बहरे हैं

तुम कहते हो अब आवाज़ उठाऊं मैं..

bilkul sahi kaha aapne. mera matlab hai aapke gurudev ne..

कोई प्रश्‍न नहीं उठता है आज कहीं

कैसे फिर विश्‍वास करूं सब मरे नहीं

तुम कहते हो राग प्रभाती गाऊं मैं

किन्‍तु सभी लाशें हैं किसे जगाऊं मैं

kamaal ki abhivyakti hai..सभी लाशें हैं किसे जगाऊं मैं

तुम कहते हो जीना इन्‍हें सिखाऊं मैं

किन्‍तु कहीं इन जैसा ना हो जाऊं मैं

aapke guruji ko janamdin ki badhaiyan aur apne tarah se zindgi jine ke liye shubhkaamnayein.


मैं सोच में पड़ गया हूँ कि इस बार छुट्टी जाने पर कोई नई रेसिपीज तो नहीं बनेगी इनसे...!!
kuch cheejon yaadon mein pirone ke kaam bhi aati hain..

गुरू जी की कविता और गज़ल!! फ़िर आपके स्वास्थ्य में सुधार....मेरी दिवाली आज से ही शुरू... गुरूदेव को जन्मदिन की बधाइयां।

Anil Pusadkar said...

बेहतरीन रचना,गुरूदेव को जन्म दिवस पर हमारी भी बधाई और आप भी ज़ल्द से ज़ल्द पूरी तरह ठीक हो जायें यही ईश्वर से प्रार्थना।

बुलेट का क्‍या करना है ये नारी ही बता सकती है । पुरुष कभी नहीं जान पाता कि नारी की संवेदनशीलता का स्‍तर क्‍या होता है । खैर उस विषय पर कभी विस्‍तार से चर्चा । पोस्‍ट के माध्‍यम से शुभकामनाएं देने के लिये आभार ।

गुरूदेव पंकज जी...... जन्म दिन की बहुत बधाई और हार्दिक शुभकामनाएँ .....

BAHOOT HI SUNDAR RACHNA SE MILWAAYA HAI AAPNE AAJ GOUTAM JI .... SHUKRIYA .... ISHVAR SE AAPKI SALAAMATI KI DUVA CHAHTA HUN .... AKSAR AAPKA CHEHRA SAAMNE JAATA HAI ......... AAPKI LAJAWAAB HANSEE ....

बिना रीढ़ की हड्डी के इन्‍सान हैं ये

अपनी ही ताकत से तक अन्‍जान हैं ये

कायरता को नाम दिया लाचारी का

क़त्‍ल कर चुके अंदर की चिंगारी का

तुम कहते हो हलचल कोई मचाऊं मैं

किन्‍तु तीलियां सीली क्‍या सुलगाऊं मैं
......
is bhawbheeni rachna se behtar uphaar aur kya hoga bhala !
hum sab ki shubhkamnayen aapke madhyam se

पंकजजी को जन्मदिन की मंगलकामनाएँ....


ओर जरा दस बारह दिन डॉ की बात मान लेना ....



आपके गुरु, हमारे लिये महागुरु , वास्ता न पड़ा तो क्या कुछ एकलव्य भी हुआ करते हैं ।
जन्मदिवस पर उन्हें मेरा नमन, साथ ही शत शत अभिनँदन !
यहाँ एकत्रित सनुदाय को इसी पेज पर अपने आशीर्वचन के दो शब्द दें, तो उनके बड़प्पन से हम सबका मान पढ़ेगा ।

भौजाई से बोल दीजो, साथ बिताये खुशनुमा पलों को सहेज कर रखें । हादसों के निशान और कारण मिटाये जाते हैं, न कि सँवारे जायें ।

rashmi ravija said...

बिना रीढ़ की हड्डी के इन्‍सान हैं ये
अपनी ही ताकत से तक अन्‍जान हैं ये

बहुत खूब....पंकज जी को जन्मदिन की अनेक शुभकामनाएं और आपका बहुत बहुत शुक्रिया, इतनी ओजपूर्ण कविता पढ़वाने के लिए
तसल्ली हुई जानकार आप स्वस्थ हो रहें हैं,जल्दी ही पुर्णतः स्वस्थ होकर घर लौटें,यही कामना है.

Meenu Khare said...

पंकजजी को जन्मदिन की मंगलकामनाएँ....


बुलेट ने झकझोर दिया! शुभकामनाएँ.

"अर्श" said...

सुबह ये यूँ कहें के कल से ही पुरे ब्लॉग जगत पे गुरु जी के जन्म दिन के खुशियाँ और बधाई सन्देश जारी है ... आपके ब्लॉग का अंदाज निराला है ,... गुरु जी के आवाज़ में उनकी ग़ज़ल सुनना अपने आप में भाग्य की बात है ,... आज का दिन तो जैसे त्यौहार की तरह मना रहा हूँ नया ज्ञानोदय में प्रेम महा विशेषांक में आज छपी उनकी कहानी "प्रेम क्या होता है ..???" एक छोटी सी कहानी है मगर पढ़ते वक्त ऐसा लगा इसके किरदार में मैं खो गया हूँ शब्दों का ऐसा समाजस्य ,... प्रेम का ये नया रूप देखने को मिला है , इस जगह पे भी प्रेम ऐसा हो सकता है सीधे परमात्मा को महसूस करा दे ,... मेरे लिए तो त्यौहार का मौसम शुरू हो गया गुरु जीके इस कहानी से ही ...

गुरु देव को उनके जन्म दिन पे करोडो करोडो बधाईयाँ..

ये बुल्लेट और टाँके की कटी धागे वाली बात मुझे समझ में नहीं आयी ... आप की सेहत की सलामती के लिए दुआएं हमेशा ही ...

अर्श

आपने बहुत शानदार तरीके से आदरणीय पंकज जी का जन्मदिवस सेलीब्रेट किया है. गीत उम्दा ह स्व0आनन्द शर्मा जी की कुछ पंक्तियां याद आ रही हैं आप भी देखें-
अब अँधेरे से मुझे संतोष होता है.
यह उजाला धमनियों में रोष बोता है.
रात मुझको अंक में भरकर यही बोली,
सूर्य सा दिखना यहाँ अब दोष होता है.
पंकज जी की आवाज़ में ग़ज़ल भी सुनी आज का दिन हमारा भी सार्थक हो गया.

mehek said...

चारों तरफ अंधेरी काली सांझ हुई

क्‍या करिये जब स्‍वयं रोशनी बांझ हुई

दिखती बाहर से तो बहुत उजाली है

किन्‍तु रोशनी अंदर से ये काली है

bahut hi sunder rachana,padhwane ke liye shukran,subir ji ko janamdin ki bahut shubkamnaye.

Priya said...

Itne dino baad aapke blog par halchal dekhi to rukh kar liya idher ka bhi...... Subeer Ji ko jamdin ka hardik abhinanadan.........aur han.....jab aapki mrs. bullet ki koi receipe banye to pls. method jaroor seekh ligiyega...& publish ur blog too...aakhir ham sab jane ki faulaad banane ke liye faulaad khana bhi jaroori hai....... Anyways Be happy always & healthy always.... Jai HInd

-Guru ko samarpit yah post aur unki nayaab gazal ,tasveeren aur unhin ki awaaz mein prabhaavshali rachna ki prastuti...bhaav-vibhor kar dene wali hai.

Bahut khushkismat hain Guru ji jinhen itne achche students miley hain.
-Pankaj Subeer ji ko Janamdin ki bahut bahut badhayee.

-Aap ko bhi jald se jald poori tarah swasth hone ke liye shubhkamnayen.

कविता पढाने और सुनाने के लिए धन्यवाद! पंकज जी के जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं! तुम्हारी तबियत के बारे में जानकार खुशी हुई.

गुरुजी को जन्मदिन की बधाई!

तसल्ली से डॉ. साहब की बात मन लीजियेगा

Nirmla Kapila said...

ेक शिष्य का एक गुर rooको इस से बडा तोहफा क्या हो सकता है कि वो अस्पताल के बिस्तर पर बैठ कर भी अपने गुरू के लिये साहित्य साधना करे और गुरू जी को जन्म दिन की बधाई इस अंदाज़ मे दे इस के लिये आदरणीय सुबीर जी बधाई के पात्र हैं उनको जन्म दिन की भी बहुत बहुत बधाई उनकी गज़लें पढवाने के लिये भी धन्यवाद आप जल्दी से ठीक हों आशीर्वाद

MANOJ KUMAR said...

वैचारिक ताजगी लिए हुए रचना विलक्षण है।
मेरी तरफ से भी पंकज जी को मंगल कमनाएं।

गुरू जी की ये कविता बहुत पसंद आती है मुझे। आवाज़ का उतार चढ़ाव भी गजब का है इसमें। सारे लिंक पढ़े गुरु जी के जन्मदिन पर उत्सव सा महौल है।

वैसे इस गुरुकुल में जेरी तो एक है मगर टॉम कदम कदम पर हैं :)

बुलेट और स्टिचेज़ के धागों का क्या होगा... सब आप ही समझ जायेंगे तो दूसरे क्या करेंगे..???

Harkirat Haqeer said...

गुरु जी को नमन व जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं .....!!

जन्मदिन की शुभकामनायें, और अद्भुत थी यह कविता, बहुत हीं अच्छी लगी ।

manu said...

दोबारा से चाय वाली ने ब्लॉग पढाने को कहा तो देखा ...
के पंकज जी की जन्मदिवस मनाया जा रहा है...ज़रा लेट हो गया..

आपके गुरु जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई...

बुलेट के बारे में हम तो क्या कह सकते हैं....?

चाय वाली से जोर देकर पूछा तो कहा के करना क्या होगा...करना तो किसी भी चीज का कुछ नहीं होता...

बस यूं ही...

देखने का दिल तो करता होगा ना...?

लेडिज की बातें..क्या जाने कोई...?

Very good mornign Gautam Sir...
"तुम कहते हो जीना इन्‍हें सिखाऊं मैं
किन्‍तु कहीं इन जैसा ना हो जाऊं मैं "..
behterin likha hai Pankaj ji ne.


Aur aproov ji ki pratikriya se mujhe bhi 'Kulta' ki yaad ho aie.
Waise receipe bhi acchi banegi....

लेडिज की बातें..क्या जाने कोई...?
....
balki ek kadam aage...

...ladies !!
Kya jaane paaie hum unhein?

सागर said...

पंकज जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं...

रही गोली की बात
आपके जिस्म में कोई और प्रवेश नहीं कर सकता इसलिए...

हाँ मैं गज़लों में गलतियाँ करता रहूँगा... आप उन कुफ्र की गलियों से गुज़रते रहना...

मीत said...

कविता का एक एक शब्द अपने आप में चिल्ला रहा है...
बेहद अच्छी लगी यह पोस्ट...
गुरु जी को मेरी तरफ से भी हार्दिक शुभकामनायें...
ओर आपकी तबियत अब कैसी है....
मीत

तुम कहते हो राग प्रभाती गाऊं मैं
किन्‍तु सभी लाशें हैं किसे जगाऊं मैं

अहाहा...क्या शब्द हैं...अन्दर तक भेदते हुए...वाह गौतम जी वाह...गुरुदेव की इस अद्भुत कविता को पढ़वा और सुनवा कर आपने जो हम पर उपकार है उस से उरिन हम कभी नहीं हो सकते...बहुत बहुत शुक्रिया...
गुरूजी स्वस्थ रहें और शतायु हों...
नीरज

ओह ! बुरी यादें भी संजोनी पड़ती हैं, ये जीवन की आखिरी ऐसी याद हो ये तहे दिल से प्रार्थना है. फिलहाल आप फटाफट स्वस्थ हो. पंकजजी को जन्मदिन की शुभकामनायें और प्रणाम.

venus kesari said...

गुरु जी को नमन व जन्मदिन की ढेरों शुभकामना

venus kesari

गुरु जी को जन्मदिन की बधाई और शुभकामनाओं। आपने भी बहुत ही प्यार से याद किया गुरु जी को। शानदार पोस्ट। सुन तो नही पाया। पर पढकर दिल खुश हो गया। फोटो का तो जवाब नही। और हाँ अपना ध्यान रखिऐगा और अनुराग जी की भी बात मान लीजिऐगा।

kshama said...

Harek panktee ne man me kolahal macha diya...kya gazab shayar hain Pankaj ji!

Uff..! Aap apnee dharampatnee ka kyon mazaq kar rahe hain...? Unse chuglee karne ka gar mauqa mila to zaroor karungee!

Aake sawalon ke jawab pesh kartee hun!( Bikhare Sitare).3 din out of station thee, to comments padh nahee payee.

Haan, sach hai Pooja Waheeda kee replica lagtee hai...ye baat lagataar usse kayee logon ne kahee...'shakl Waheeda kee aur baal Meena kumaree ke..'

Pooja ne manganee ke pahlehee mangetar ko kah diya tha ki, gar uske uske jeevan me any koyi aaya to wo manganee tod bhee saktee hai..ladke ko apne aap pe wishwas tha....kuchh baaten vidhi likhit hotee hain...jo hoke rahtee hain..

Dada ji ke swabhav ka vishleshan kiya hai...aapko uttar diya tha, ki, Pooja khud sambhram me rahee.."Cirag tale andhera"...aur koyi karan nahee..

सच कहा भाई, कविता तो आग लगाने में सक्षम है।
जन्म दिन की बधाई मेरी ओर से भी पहुंचाएं।
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Sheena said...

aapke guruji ki likhi kavita ka ek ek shabd dil ko choo gaya

Thanks for sharing his creation

-Sheena

JHAROKHA said...

पंकज सुबीर जी को जन्म्दिवस की हार्दिक मंगलकामनायें और आपको आभार उनकी रचना सुनवाने के लिये।
पूनम

manu said...

nayee post dal do mejar saahib...!!!

ham kai baar padh chuke is post ko...


har jagah kahaan chhapte hain hamaare comments.....?????

ap ke alaawaa aur kaun sunegaa hamaari...??

kaun manegaa hamaari zid ko...??????

sab ke sab ...darpok hain...!!!

पंकज सुबीर जी को जन्म दिन की शुभ कामनाएँ, देर आये दुरुस्त आये । उनकी गजल पढवा भी दी और सुनवा भी दी, धन्यवाद । आपका पुनश्च पढ कर आँखें भर आईँ । आप जल्द ही स्वस्थ हों और घर वापस लौटें धागे और बुलेट लेकर, यही शुभ कामना ।